अभी का समय सोचने का है। कोरोना के कारण समस्या गंभीर है। पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है। इसके पर्याप्त कारण भी है। पूरी दुनिया ने माना है कि हम भारतीयों का रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत अधिक मजबूत है। इसके पीछे हमारी जीवनशैली और खान पान की आदत है। मौसम की विविधता है। हमारा संस्कार है। कई संस्कार ऐसे हैं, जो हमें अपने घर और परिवार में ही सिखाएं जाते हैं। कई संस्कार गुरुओं की संगत से आती है।
धरती पर बैठकर करें भोजन

जमीन पर बैठकर खाना खाने का अर्थ सिर्फ भोजन करने से नहीं है, यह एक प्रकार का योगासन कहा जाता है। जब भारतीय परंपरानुसार हम जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं तो उस तरीके को सुखासन या पद्मासन की तरह देखा जाता है। यह आसन हमारे स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभप्रद है।इस तरीके से बैठने से आपकी रीढ़ की हड्डी के निचले भाग पर जोर पड़ता है, जिससे आपके शरीर को आरामदायक अनुभव होता है। इससे आपकी सांस थोड़ी धीमी पड़ती है, मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है और रक्तचाप में भी कमी आती है। इस आसन में बैठने से पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है, जिससे खाना जल्दी पचता है।जमीन पर बैठकर खाने से आपको भोजन करने के लिए प्लेट की तरफ झुकना होता है, यह एक नैचुरल पोज है। लगातार आगे होकर झुकने और फिर पीछे होने की प्रक्रिया से आपके पेट की मांसपेशियां निरंतर कार्यरत रहती हैं, जिसकी वजह से आपकी पाचन क्रिया में सुधार होता है।
एक साथ बैठकर खाने से फैमिली बॉंडिंग स्ट्रॉंग होती है, ये बात तो आप जानते ही हैं। साथ ही पद्मासन में बैठकर खाने से आप मानसिक तनाव से दूर होते हैं, जिससे आप अपने परिवार के साथ एक अच्छा टाइम बिता सकते हैं। तो फिर अगली बार से जमीन पर बैठकर खाना खाने में शर्म महसूस मत कीजिए। अरे भई! ये शर्म का नहीं हेल्थ का विषय है। वैसे भी हमारे पूर्वजों ने जिस परंपरा को बनाया है, वह गलत तो नहीं हो सकती इसलिए आवश्यकता है कि उनकी वैज्ञानिकता को समझकर व्यवहार करें।
केला का पत्ता है बेहतर विकल्प
चम्मच से दूरी भी होगा सेहत का राज
कुछ दिन पूर्व अमेरिकी फिजिशियन मार्क हाइमन ने अपने शोध में कहा था कि यदि हम चम्मच के बजाय हाथों से भोजन ग्रहण करते हैं, तो वह हमारे स्वास्थ्य और देह के लिए अधिक लाभदायक है। अगर आप भोजन का स्पर्श नहीं करेंगे तो आपको पता ही नहीं चलेगा कि वह है क्या? खाने से पहले उस भोजन को जानना जरूरी है, जो आपके शरीर का हिस्सा बनने जा रहा है। अगर आप भौतिक रूप से हाथ से इसका स्पर्श नहीं भी करते, फिर भी आप सचेत हो कर साफ तौर पर जान सकते हैं कि सामने आया भोजन कैसा है और इसका आपके शरीर पर कैसा असर होगा? कोई भी भोजन आपके भीतर जाना चाहिए या नहीं, इसका निर्णय बदलता रहता है।
हमें खाना खाते वक्त अपने हाथों व उंगलियों का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि भोजन का स्पर्श करने से हम भोजन से जुड़े हुए रहते हैं। आपके हाथों की सफाई पूरी तरह से आपके हाथ में है। हो सकता है कि कांटे की सफाई आपके हाथ में न हो। आपके हाथों का इस्तेमाल आपके अलावा किसी और ने नहीं किया, इसलिए आपके अलावा किसी दूसरे को नहीं पता होगा कि वह कितने साफ या गंदे हैं? जबकि कांटे को लेकर आपको पता नहीं होता कि किसने इसे छुआ था, किसने इसका इस्तेमाल किया, कैसे और किस काम के लिए इस्तेमाल किया।
जब हम हाथ से खाना खाते हैं तब उंगुलियां और हाथ के उंगूठे आपस में मिलने से जो मुद्रा बनती है, उसके कारण शरीर में विशेष रूप से ऊर्जा पैदा होती है जो शरीर को स्वस्थ्य रखने में सहायक है। हाथ से खाना खाना स्पर्श चिकित्सा समान है। इसमें हमारे हाथ, मुंह, पेट और दिमाग में भी एक तरह का संबंध बनता है शरीर के आंतरिक संकेतों के जरिए ही खाना पचता है। इससे शरीर सुपोषित होता है।
Zara sa parivartan jo aapko rakhega fit or hit