हरेक सवारी पर भारी, साइकिल की सवारी – तरूण शर्मा

आज के इस आपाधापी वाले युग में वाहनों से निकलता धुंआ, और उनका शोर पर्यावरण को तो क्षति पहुंचा ही रहा है साथ ही साथ कहीं न कहीं वह हमें भी नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में याद आती है साइकिल! इस दो पहिया वाहन की बात ही निराली है। इससे न शोर होता है और न ही धुंआ! यह इको फ्रेंडली वाहन दुनिया का सबसे सस्ता और विश्वसनीय साधन है।
साइकिल, जिसे ‘बाइक या बाइसाइकल’ भी कहा जाता है, एक मानव-चालित, मोटर-चालित, या पैडल-चालित, एकल-ट्रैक वाहन है, जिसमें दो पहिए एक फ्रेम से जुड़े होते हैं, एक के पीछे एक। इस लोकप्रिय सवारी को हिंदी में ‘द्विचक्र वाहिनी’ और संस्कृत में ‘द्विचक्रिका’ कहा जाता है। तथा साइकिल सवार को ‘साइकिल चालक’ कहा जाता है।
आज के इस दौर में जहां हमारी निर्भरता परिवहन के आधुनिक उपकरणों की ओर तेजी से बढ़ रही है ऐसे में साइकिल सेहत के लिए बहुत उपयोगी हो गई है। पिछले 2 वर्षों में हमने यह देखा कि लोगों की दिलचस्पी अब साइकिल में भी बढ़ी है। कोरोना महामारी के उन कठिन दिनों में लोगों ने पर्यावरण का महत्व तो समझा ही साथ ही पर्यावरण के लिए लाभकारी साधन साइकिल की उपयोगिता को भी समझा।
हरेक आविष्कार से जुड़ा होता है आविष्कारक का नाम, पर साइकिल का आविष्कार किसने किया, इस पर इतिहासकार एकमत नहीं हैं। माना जाता है कि, दो पहियों वाली पहली साइकिल जर्मनी में बनी। आविष्कारक थे – बेरोन कार्ल वॉन ड्रेस। वर्ष 1817 में उन्होंने 14 किमी. तक साइकिल की सवारी की थी। 1818 में इस अनोखी मशीन को लोगों ने पहली बार पेरिस में लगाई गई एक प्रदर्शनी में देखा। कुछ इतिहासकार साइकिल में पैडल के आविष्कार का श्रेय स्कॉटलैंड के लुहार किर्कपैट्रिक मैकमिलन को देते हैं। उन्होंने इसका आविष्कार 1812 से 1878 के बीच किया गया था।
भारत में भी साइकिल के पहियों ने आर्थिक तरक्की में अहम भूमिका निभाई। 1947 में आजादी के बाद अगले कई दशक तक देश में साइकिल यातायात व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा रही। खासतौर पर 1960 से लेकर 1990 तक भारत में ज्यादातर परिवारों के पास साइकिल थी। यह व्यक्तिगत यातायात का सबसे ताकतवर और किफायती साधन था। गांवों में किसान साप्ताहिक मंडियों तक सब्जी और फसलों को साइकिल से ही ले जाते थे। दूध की सप्लाई गांवों से पास के कस्बाई बाजारों तक साइकिल के जरिये ही होती थी। डाक विभाग का तो पूरा तंत्र ही साइकिल के बूते चलता था। आज भी पोस्टमैन साइकिल से चिट्ठियां बांटते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत में साइकिल का कारोबार करीब 7,000 करोड़ रुपये का है। दुकानदारों का कहना है कि, कोरोना के बाद से साइकिल की मांग में तेजी से बढ़ोतरी आई है। ज्यादातर डीलर्स का कहना है कि कोरोना काल से पहले के मुकाबले साइकिल की मांग और भी ज्यादा बढ़ी है। भारत दुनिया का अब दूसरा सबसे बड़ा साइकिल बाजार बन गया है। आंकड़ों के मुताबिक 2019 तक गुजरे पांच वित्तीय वर्षों में साइकिल की बिक्री ने लगभग पांच फीसदी की सालाना वृद्धि दर दर्ज की है।
साइकिल की सवारी शारीरिक क्षमता के साथ बौद्धिक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नियमित रूप से 20 से 30 मिनट साइकिल चलाई जाए तो तनाव पर नियंत्रण के साथ ही मांसपेशियों में मजबूती आती है। इससे दिल से लेकर दिमाग तक स्वस्थ रहता है। इतना ही नहीं सभी
बीमारियों की जड़ माने जाने वाले बढ़ते वजन को भी नियंत्रित करने में साइकिल की मुख्य भूमिका है, इसलिए डॉक्टर दवाओं के साथ साइकिल चलाने की भी सलाह देते हैं।
साइकिल बहुत सारी खूबियो वाला वाहन है जिसे हो सके तो हर व्यक्ति को अपने जीवन व दिनचर्या में ज़रूर शामिल करना चाहिए। यदि पूरी दुनिया सप्ताह में एक दिन भी साइकिल का प्रयोग करे तो ईंधन की भी बचत होगी, प्रदुषण का स्तर भी कम होगा और सेहत भी तंदुरस्त रहेगी।
आज के इस आपाधापी वाले युग में वाहनों से निकलता धुंआ, और उनका शोर पर्यावरण को तो क्षति पहुंचा ही रहा है साथ ही साथ कहीं न कहीं वह हमें भी नुकसान पहुंचा रहा है। ऐसे में याद आती है साइकिल! इस दो पहिया वाहन की बात ही निराली है। इससे न शोर होता है और न ही धुंआ! यह इको फ्रेंडली वाहन दुनिया का सबसे सस्ता और विश्वसनीय साधन है।
साइकिल, जिसे ‘बाइक या बाइसाइकल’ भी कहा जाता है, एक मानव-चालित, मोटर-चालित, या पैडल-चालित, एकल-ट्रैक वाहन है, जिसमें दो पहिए एक फ्रेम से जुड़े होते हैं, एक के पीछे एक। इस लोकप्रिय सवारी को हिंदी में ‘द्विचक्र वाहिनी’ और संस्कृत में ‘द्विचक्रिका’ कहा जाता है। तथा साइकिल सवार को ‘साइकिल चालक’ कहा जाता है।
आज के इस दौर में जहां हमारी निर्भरता परिवहन के आधुनिक उपकरणों की ओर तेजी से बढ़ रही है ऐसे में साइकिल सेहत के लिए बहुत उपयोगी हो गई है। पिछले 2 वर्षों में हमने यह देखा कि लोगों की दिलचस्पी अब साइकिल में भी बढ़ी है। कोरोना महामारी के उन कठिन दिनों में लोगों ने पर्यावरण का महत्व तो समझा ही साथ ही पर्यावरण के लिए लाभकारी साधन साइकिल की उपयोगिता को भी समझा।
हरेक आविष्कार से जुड़ा होता है आविष्कारक का नाम, पर साइकिल का आविष्कार किसने किया, इस पर इतिहासकार एकमत नहीं हैं। माना जाता है कि, दो पहियों वाली पहली साइकिल जर्मनी में बनी। आविष्कारक थे – बेरोन कार्ल वॉन ड्रेस। वर्ष 1817 में उन्होंने 14 किमी. तक साइकिल की सवारी की थी। 1818 में इस अनोखी मशीन को लोगों ने पहली बार पेरिस में लगाई गई एक प्रदर्शनी में देखा। कुछ इतिहासकार साइकिल में पैडल के आविष्कार का श्रेय स्कॉटलैंड के लुहार किर्कपैट्रिक मैकमिलन को देते हैं। उन्होंने इसका आविष्कार 1812 से 1878 के बीच किया गया था।
भारत में भी साइकिल के पहियों ने आर्थिक तरक्की में अहम भूमिका निभाई। 1947 में आजादी के बाद अगले कई दशक तक देश में साइकिल यातायात व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा रही। खासतौर पर 1960 से लेकर 1990 तक भारत में ज्यादातर परिवारों के पास साइकिल थी। यह व्यक्तिगत यातायात का सबसे ताकतवर और किफायती साधन था। गांवों में किसान साप्ताहिक मंडियों तक सब्जी और फसलों को साइकिल से ही ले जाते थे। दूध की सप्लाई गांवों से पास के कस्बाई बाजारों तक साइकिल के जरिये ही होती थी। डाक विभाग का तो पूरा तंत्र ही साइकिल के बूते चलता था। आज भी पोस्टमैन साइकिल से चिट्ठियां बांटते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत में साइकिल का कारोबार करीब 7,000 करोड़ रुपये का है। दुकानदारों का कहना है कि, कोरोना के बाद से साइकिल की मांग में तेजी से बढ़ोतरी आई है। ज्यादातर डीलर्स का कहना है कि कोरोना काल से पहले के मुकाबले साइकिल की मांग और भी ज्यादा बढ़ी है। भारत दुनिया का अब दूसरा सबसे बड़ा साइकिल बाजार बन गया है। आंकड़ों के मुताबिक 2019 तक गुजरे पांच वित्तीय वर्षों में साइकिल की बिक्री ने लगभग पांच फीसदी की सालाना वृद्धि दर दर्ज की है।
साइकिल की सवारी शारीरिक क्षमता के साथ बौद्धिक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नियमित रूप से 20 से 30 मिनट साइकिल चलाई जाए तो तनाव पर नियंत्रण के साथ ही मांसपेशियों में मजबूती आती है। इससे दिल से लेकर दिमाग तक स्वस्थ रहता है। इतना ही नहीं सभी बीमारियों की जड़ माने जाने वाले बढ़ते वजन को भी नियंत्रित करने में साइकिल की मुख्य भूमिका है, इसलिए डॉक्टर दवाओं के साथ साइकिल चलाने की भी सलाह देते हैं।
साइकिल बहुत सारी खूबियो वाला वाहन है जिसे हो सके तो हर व्यक्ति को अपने जीवन व दिनचर्या में ज़रूर शामिल करना चाहिए। यदि पूरी दुनिया सप्ताह में एक दिन भी साइकिल का प्रयोग करे तो ईंधन की भी बचत होगी, प्रदुषण का स्तर भी कम होगा और सेहत भी तंदुरस्त रहेगी।

Har ek sawari par bhari, Cycle ki sawari – Tarun sharma
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